हमारे भारतीय समाज मे ग्रहण को लेकर बहुत ज्यादा मान्यताएं है। ग्रहण को शुभ नही माना जाता है। सूतक काल से लेकर ग्रहण की समाप्ति तक देश भर के मंदिरो के कपाट बंद कर दिए जाते है। यही नही बल्कि घरो के मंदिरो के पट भी बंद कर दिए जाते है। सूतक से ही किसी भी तरह की पूजा पाठ, दान और मांग्लिक कार्य बंद कर दिए जाते है।

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार ग्रहण काल मे भगवान को छूना मना है साथ ही कुछ श्रद्धालुओ को रोज मंदिर जाने की आदत होती है ऐसे ही लोगो को ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए मंदिरो को कपाट बंद कर दिए जाते है।

भगवान की मूर्तियों को सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत माना जाता है तो ग्रहण की नकारात्मक किरणो से भगवान की मूर्तियों को बचाने के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते है साथ ही भगवान की मूर्तियों को पास तुलसा जी की पत्ती रख दी जाती है जिससे ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का असर कम हो जाएं।

ग्रहण समाप्ति के बाद सबसे पहले मंदिरो की साफ सफाई करी जाती है, भगवानो का स्नान कराकर उन्हे दूसरे कपड़े पहनाए जाते है और फिर पूजा पाठ और आरती करी जाती है। ऐसा ही घरो मे भी करा जाता है।