हमारे भारतीय शास्त्रो मे सूतक के समय से लेकर ग्रहण समाप्ति तक और उसके बाद मे भी कुछ नियमे का पालन करना अनिवार्य माना गया है। शास्त्रो के अनुसार ग्रहण  के दौरान नकारात्मक शक्तियाँ हमारे आस पास रहती है इन्ही नकारात्मक शक्तियो को अपने से दूर करने के लिए ग्रहण से पहले और ग्रहण के बाद नहाने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से शरीर फिर से भगवान की पूजा अर्चना करने के लिए शुद्ध माना जाता है।

भारतीय शास्त्रो के अनुसार जब केतु चंद्र को ग्रसित कर लेता है तब चंद्र ग्रहण लगता है। जिससे केतु की नकारात्मक शक्तियाँ बलवान हो जाती है। केवल शास्त्र ही नही बल्कि अब तो वैज्ञानिको ने भी इस बात को मान लिया है कि चंद्र ग्रहण के समय बैक्टिरीया का प्रभाव बढने से हमार स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ता है।

इन्ही सभी कारणो से ग्रहण के बाद नहाना जरूरी हो जाता है। लेकिन यदि किसी कारणवश आप ग्रहण के बाद नही नहा सकते तो शास्त्रो मे इसका भी उपाय है। ऐसे मे व्यकित को अपने ऊपर गंगा जल छिड़क लेना चाहिए और साथ ही थोड़ा सा गंगा जल पी भी लेना चाहिए। अपने पूरे घर मे भी गंगा जल का छिड़काव करके उसे शुद्ध कर देना चाहिए।