भोले भंडारी यानी भगवान शंकर। भगवान शंकर बहुत ही भोले माने जाते है इसी कारण इन्हे भोलेनाथ भी कहा जाता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर भक्तो की थोडी ही भक्ति मे बहुत खुश हो जाते है। प्रभु तो बस भक्तो की भक्ति, प्यार और विश्वास के भूखे है। ऐसा ही एक रिश्ता भगवान शंकर और उनके भक्त यमराज का है। यमराज यानि की मृत्यु के देवता।

एक दिन यमराज ने देखा कि भगवान शंकर बिना किसी वाहन के चलते है तो यमराज ने घोर तपस्या शुरू कर दी। यमराज की इस तपस्या से खुश होकर भोलेनाथ ने यमराज के कहने पर यमराज को अपना वाहन नियुक्त कर लिया।

भगवान शंकर ने यमराज को अपने वाहन के लिए बैल का रूप दिया क्योकि बैल मन के बहुत साफ होते है। साथ ही भगवान शंकर ने नंदी को आर्शिवाद दिया कि मुझसे पहले तुम्हारी पूजा होगी। ऐसी भी मान्यता है कि भगवान शंकर से कुछ भी मानने से पहल नंदी के कान मे अपनी इच्छा बोलनी पड़ती है तभी भोलेनाथ उसे पूरा करते है।