भारत मे कई धर्म है और हर धर्म के अलग अलग रीति रिवाज है। इन्ही रिवाजो मे से एक है महावर लगाना। महावर को आलता भी कहते है। सुहागन महिलाएं अपने पति की मंगलकामना के लिए महावर लगाती है। बिना महावर सुहागन का श्रंगार अधूरा माना जाता है। महावर कई प्रकार का आता है लेकिन पान के पत्ते का और लाक का बना महावर सबसे ज्यादा शुद्ध माना जाता है।

महावर लगाना ना सिर्फ एक रिवाज है बल्कि इससे एड़ियां भी सुंदर दिखती है और अब तो वैज्ञानिक भी मानते है कि आलता स्वास्थय की दृष्टि से भी अच्छा है। आलता लगाने से एड़ियो को ठंडर पहुंचती है और तनाव भी कम होता है। आलता कैसे लगाए- सुहागन महिलाएं पूरी एडी भर कर आलता लगाए और कुवारी लड़कियाँ एड़ी को बिना भरे आलता लगाए।

कब ना लगाए- महावर को सूरज डूबने के बाद ना लगाए, दक्षिण की ओर मुख करके ना लगाए, चौखट पर बैठ कर ना लगाए, महावर लगाने क तुरंत बाद कभी भी हाथ ना धोएं।

कब लगाए- किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले आलता लगता है, बारिश के दौरान, त्योहारो पर, बच्चा होने पर, नई बहु के घर आने पर, और जब महिला किसान पानी वाले खेत पर जाती है तो उसमे घुसने से पहले महावर लगाए।