नंदी भगवान शंकर के वाहन के रूप मे विश्वविख्यात है। नंदी केवल भगवान शंकर के वाहन ही नही बल्कि द्वारपाल भी है। बहुत ही घोर तपस्या करके नंदी ने भगवान शंकर से यह वरदान माँगा था कि नंदी हर पल शिव समीप रहे। नंदी एक बैल के रूप मे है। जहाँ भोले भंड़ारी होंगे वहाँ नंदी जरूर होंगे। आपने मंदिरो मे देखा होगा की नंदी हमेशा भगवान शंकर की ओर ही मुँह करके बैठते है।

नंदी भक्ति, शक्ति, बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक माने जाते है। कहा जाता है कि जब भगवान शंकर द्वारा समुद्र मंथन मे से निकलने वाले विष को पिया गया तो कुछ बूंदे जमीन पर गिर गई जिसे नंदी ने अपनी जीभ से चाट लिया  इसलिए भी नंदी भगवान शंकर के प्रिय है।

भगवान शंकर ने नंदी की भक्ति और दृढ़ विश्वास को देखकर यह वरदान दिया था कि जहाँ जहाँ मै रहूँगा वहाँ तुम्हारा भी निवास होगा यही कारण हो कि भगवान भोले नाथ के हर मंदिर मे उनकी प्रतिमा के सामने नंदी स्थापित होते है।